छोड़ा मह-ए-नख़शब की तरह दस्त-ए-क़ज़ा ने ख़ुर्शीद हुनूज़ उस के बराबर न हुआ था

“The hand of Fate cast him down like the fabled moon of Nakhshab, though even the sun had not yet risen to rival his light.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

भाग्य के हाथ ने उसे नख़शब के कृत्रिम चाँद की तरह गिरा दिया, जबकि अभी सूरज भी उसकी बराबरी नहीं कर सका था।

विस्तार

यह शेर 'मह-ए-नख़शब' की मशहूर दास्तान पर आधारित है—एक तिलिस्मी चाँद जो अपनी अनोखी चमक से सबको हैरान कर अचानक ग़ायब हो गया था। शायर यहाँ किसी बेहद हसीन या अज़ीज़ शख़्स के वक़्त से पहले दुनिया से चले जाने का दर्द बयान कर रहा है, जिसे क़िस्मत के बेरहम हाथ ने असमय ही छीन लिया। गहरा अफ़सोस इस बात का है कि अभी तो सूरज भी उसकी बुलंदी और ताबिंदगी की बराबरी नहीं कर पाया था कि उसे हमेशा के लिए बुझा दिया गया।

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