“Blessed is that heart which is entirely a charm of unawareness,Madness, despair, and grief are the sustenance of seeking desires.”
खुश है वह दिल जो पूरी तरह से बेख़बरी के जादू में हो; जुनून, निराशा और दुःख ही इच्छाओं की तलाश का परिणाम हैं।
ख़ुशा वो दिल कि सरापा तिलिस्म-ए-बे-ख़बरी हो, जुनून ओ यास ओ अलम रिज़्क़-ए-मुद्दआ-तलबी है। Khusha vo dil ki sarapa tilism-e-be-khabri ho, Junoon o yaas o alam rizq-e-muddaa-talbi hai. कितना भाग्यशाली है वो दिल जो पूरी तरह से अनभिज्ञता के जादू में डूबा हुआ हो। पागलपन, निराशा और दुख उन लोगों का भोजन है जो निरंतर किसी लक्ष्य या इच्छा की तलाश में रहते हैं। ख़ुशा शब्द का अर्थ है भाग्यशाली, सरापा का मतलब है सिर से पैर तक, और तिलिस्म-ए-बे-ख़बरी का अर्थ है कुछ न जानने की एक जादुई स्थिति। यास का अर्थ है घोर निराशा और मुद्दआ-तलबी का मतलब है किसी मक़सद को पाने की चाहत। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ हमें मन की शांति का एक बहुत ही सरल लेकिन गहरा रास्ता दिखा रहे हैं। हम अपनी पूरी ज़िंदगी चीज़ों के पीछे भागते हैं, यह सोचकर कि उन्हें पाकर हम खुश होंगे। पर ग़ालिब कहते हैं कि यह 'चाहत' ही हमारे पागलपन और ग़म की खुराक है। उनके अनुसार, सबसे सुखी वो है जो इस दुनिया के झमेलों से बेख़बर है। यह एक ऐसी जादुई हालत है जहाँ दिल को कुछ माँगने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। जब कोई उम्मीद ही नहीं होगी, तो टूटने का डर भी नहीं रहेगा। यह कुछ वैसा ही है जैसे एक बच्चा मिट्टी में खेलकर खुश रहता है क्योंकि उसे बड़े मकानों की चाहत नहीं होती। ग़ालिब उस दिल की सराहना कर रहे हैं जिसने माँगना छोड़ दिया है। यह एक ऐसे व्यक्ति की तरह है जो संगीत में इतना खो गया हो कि उसे अपने आस-पास की भीड़ का एहसास ही न हो। जैसा कि प्रसिद्ध है, अज्ञानता कभी-कभी परमानंद बन जाती है। शांति का असली राज़ इच्छाओं की पूर्ति में नहीं, बल्कि इच्छाओं से मुक्ति में है।
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