“To note the beggars' flaws is the height of discourtesy,For even a dry thorn claims its garden ancestry.”
गरीबों की कमियों को देखना बहुत बड़ी बेअदबी है, क्योंकि सूखी हुई काँटेदार झाड़ी भी खुद को चमन से संबंधित होने का दावा करती है।
नज़र ब-नक़्स-ए-गदायाँ कमाल-ए-बे-अदबी है, कि ख़ार-ए-ख़ुश्क को भी दावा-ए-चमन-नसबी है। (Nazar ba-naqs-e-gadayan kamal-e-be-adabi hai, Ki khar-e-khushk ko bhi dawa-e-chaman-nasabi hai.) गरीब या लाचार लोगों की कमियों को देखना बहुत बड़ी बदतमीज़ी है। क्योंकि एक सूखा कांटा भी यह दावा करता है कि वह कभी किसी सुंदर बगीचे का हिस्सा था। शब्द नक़्स का अर्थ है दोष या कमी, गदायाँ का मतलब है भिखारी या गरीब लोग, और चमन-नसबी का अर्थ है बगीचे से संबंध या ऊँचा खानदान। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ हमें इंसानियत की एक बहुत बड़ी सीख दे रहे हैं। अक्सर हम उन लोगों को छोटा समझते हैं जो आज आर्थिक रूप से या हालातों की वजह से कमज़ोर पड़ गए हैं। ग़ालिब कहते हैं कि यह हमारी सबसे बड़ी भूल है। हर इंसान का अपना एक इतिहास और गौरव होता है। वह सूखा कांटा जो आज बेकार दिखता है, कभी उसी पौधे का हिस्सा था जिस पर सुंदर फूल खिले थे। उसकी जड़ें भी उतनी ही ऊंची हैं जितनी किसी गुलाब की। इसलिए किसी की आज की गरीबी देखकर उसकी असलियत का अपमान करना सबसे बड़ी बेअदबी है। यह वैसा ही है जैसे किसी पुराने और टूटे हुए साज़ को देखकर उसे बेकार समझ लेना, यह भूलकर कि कभी इससे बहुत सुरीला संगीत निकलता था। किसी की वर्तमान स्थिति को देखकर उसके अस्तित्व की गरिमा को कम मत समझो।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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