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दिला ये दर्द-ओ-अलम भी तो मुग़्तनिम है कि आख़िर
न गिर्या-ए-सहरी है न आह-ए-नीम-शबी है

O heart, even this pain and sorrow is a blessing now, for in the end There is neither the dawn's lament nor the midnight sigh.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ऐ दिल, यह दर्द और दुख भी तो ग़नीमत है, क्योंकि आख़िर न सुबह का रोना है और न आधी रात की आह।

विस्तार

दिला ये दर्द-ओ-अलम भी तो मुग़्तनिम है कि आख़िर / न गिर्या-ए-सहरी है न आह-ए-नीम-शबी है | Dila ye dard-o-alam bhi to mughtanim hai ki aakhir / Na girya-e-sahari hai na aah-e-neem-shabi hai. ऐ मेरे दिल, इस दुख और दर्द को भी एक तोहफ़ा समझो क्योंकि आख़िरकार न तो सुबह का रोना रहेगा और न ही आधी रात की आहें। शब्द अलम का मतलब है गहरा दुख और मुग़्तनिम का अर्थ है किसी चीज़ को कीमती या वरदान मानना। गिर्या-ए-सहरी का मतलब है सुबह-सवेरे रोना और आह-ए-नीम-शबी उन आहों को कहते हैं जो हम आधी रात के सन्नाटे में भरते हैं। [आह] मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक बहुत ही अनोखी बात कह रहे हैं। वे अपने दिल को समझा रहे हैं कि यह जो तुम्हें दर्द हो रहा है, इसे ज़ाया मत समझो। [छोटा ठहराव] यह दर्द भी एक नेमत है। वे कह रहे हैं कि जब तक तुम रो रहे हो, जब तक तुम्हारी आहें निकल रही हैं, इसका मतलब है कि तुम अभी ज़िंदा हो। तुम्हारे अंदर की इंसानियत अभी मरी नहीं है। वे हमें उस खामोशी से आगाह कर रहे हैं जो अंत में आने वाली है, जहाँ न कोई अहसास होगा और न ही कोई तड़प। वह सन्नाटा इस रोने से कहीं ज़्यादा डरावना है। इसकी मिसाल एक पुरानी घड़ी जैसी है जो टिक-टिक करती है। उसकी आवाज़ शायद शोर लगे, लेकिन वह शोर ही सबूत है कि घड़ी अभी चल रही है। जिस दिन वह आवाज़ बंद हो गई, समझो वक़्त ठहर गया। आज के इन आँसुओं को सहेज कर रखो क्योंकि ये इस बात का सबूत हैं कि तुम्हारा दिल अभी पत्थर नहीं हुआ है।

कठिन शब्द
मुग़्तनिमopportune, valuable, to be prized, fortunate
दर्द-ओ-अलमpain and sorrow, suffering
गिर्या-ए-सहरीcrying at dawn, morning lamentation
आह-ए-नीम-शबीmidnight sigh, sighing in the middle of the night

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पाठ
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