जुनूँ तोहमत-कश-ए-तस्कीं न हो गर शादमानी की — मिर्ज़ा ग़ालिब
“If passion bears no blame for seeking the solace of delight, life's relish is but salt sprinkled upon the wounded heart.”
अर्थ
अगर दीवानगी पर खुशी से सुकून पाने का इल्ज़ाम न लगे, तो ज़िंदगी का मज़ा दिल के ज़ख़्म पर नमक छिड़कने के सिवा कुछ नहीं है।
विस्तार
ग़ालिब यहाँ एक गहरा विरोधाभास पेश करते हैं कि जिसे दुनिया 'ज़िंदगी की लज़्ज़त' या सुख समझती है, वह दरअसल आशिक़ के ज़ख़्मी दिल पर नमक छिड़कने जैसा है। सच्चे जुनूँ या इश्क़ को यह गवारा नहीं कि उस पर दुनियावी ख़ुशियों से बहलने का इल्ज़ाम लगे। आशिक़ का दर्द इतना अज़ीम है कि मामूली राहतें उसके दर्द को मिटाने के बजाय और गहरा कर देती हैं।
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