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तिमसाल में तेरी है वो शोख़ी कि ब-सद-ज़ौक़
आईना ब-अंदाज़-ए-गुल आग़ोश-कुशा है

Such charm and mischief in your image dwell,The mirror, with a hundred fond desires,Like a flower, its embrace it opens well.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

तुम्हारी छवि में ऐसी शोख़ी है कि दर्पण सौ इच्छाओं के साथ, एक फूल की तरह अपना आगोश खोल रहा है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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