क्या कहूँ बीमारी-ए-ग़म की फ़राग़त का बयाँ
जो कि खाया ख़ून-ए-दिल बे-मिन्नत-ए-कैमूस था
“How shall I describe the end of my sorrow's plight?My heart's own blood I drank, no healer sought its right.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं अपने ग़म की बीमारी की समाप्ति का क्या बयान करूँ? मैंने अपने दिल का खून पिया, किसी वैद्य की सहायता के बिना।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
