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दाग़ हम दीगर हैं अहल-ए-बाग़ गर गुल हो शहीद लाला चश्म-ए-हसरत-आलूद-ए-चराग़-ए-कुश्ता है

Our scars are of a different kind, O garden's folk, though the rose be martyred. The tulip is an eye, steeped in longing, of an extinguished lamp.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बाग़ के लोगों, हमारे घाव भिन्न हैं, भले ही गुलाब शहीद हो जाए। लाला एक बुझे हुए चिराग़ की हसरत से भरी आँख है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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