“So fiercely does it surge as blood within the grapevine's vein, that on pinions of vivid hue, the wave of wine unfolds its wings.”
अंगूर की बेल की नसों में शराब खून बनकर इस कदर दौड़ रही है कि शराब की लहर गहरे रंगों के बड़े पंख फैलाकर उड़ने को तैयार लगती है।
ग़ालिब यहाँ अंगूर की बेल और शराब की पैदाइश में एक ग़ज़ब की बेचैन ज़िंदगी देखते हैं। वे कहते हैं कि अंगूर की नसों में रस ऐसे दौड़ा है जैसे लहू खौल रहा हो, और उसी बेपनाह जज़्बे से शराब की यह शोख़ लहर रंगों के पर फैलाकर उड़ने को बेताब है। यह सिर्फ़ शराब की बात नहीं, बल्कि अंदर छुपी उस तड़प और आग का बयान है जो किसी भी ख़ूबसूरत तख़्लीक़ को जन्म देती है।
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