न पाया दर्दमंद-ए-दूरी-ए-यारान-ए-यक-दिल ने सवाद-ए-ख़त्त-ए-पेशानी से नुस्ख़ा मोम्याई का

“The soul aching from the parting of kindred friends could find / No healing balm inscribed in the dark lines of fate upon the brow.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

सच्चे दोस्तों की जुदाई से तड़पते हुए व्यक्ति को अपने माथे की तक़दीर की लकीरों में भी अपने ज़ख़्म के इलाज (मोमियाई) का कोई नुस्ख़ा नहीं मिला।

विस्तार

इस शेर में सच्चा दर्द अपने हम-दिली दोस्तों से बिछड़ने का है। शायर अपनी पेशानी यानी माथे पर खिंची तक़दीर की काली लकीरों को देखता है, गोया उनमें 'मोमियाई'—यानी हर ज़ख़्म को भरने वाले जादुई मरहम—का कोई नुस्ख़ा लिखा हो। मगर उसे मायूसी मिलती है; यह अहसास कितना गहरा है कि सच्चे दोस्तों की जुदाई का दर्द ऐसा घाव है जिसका इलाज खुद मुक़द्दर के पास भी नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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