“It is the originator of the witty style of my nature's speech,How can I call the mirror of my thoughts parrot-like?”
यह बुद्धि की सूक्ष्म अभिव्यक्ति की शैली का निर्माता है; क्या मैं कल्पना के दर्पण को तोते जैसा कहूँ?
तर्ज़-आफ़रीन-ए-नुक्ता-सराई-ए-तब' है, आईना-ए-ख़याल को तूती-नुमा कहूँ। मेरी प्रकृति जिस तरह से बारीक बातें कहती है, उसके लिए मैं अपनी कल्पना के आईने को तोते को बोलने वाला आईना कहूँगा। शब्द तर्ज़-आफ़रीन का मतलब है नया अंदाज़ बनाने वाला, और नुक्ता-सराई का अर्थ है गहरी या सूक्ष्म बातें कहना। ग़ालिब हमें बता रहे हैं कि उनकी शायरी की जड़ें कहाँ हैं। पुराने समय में तोते को बात करना सिखाने के लिए उसके सामने एक आईना रखा जाता था। ग़ालिब कहते हैं कि मेरा मन भी वैसा ही एक आईना है जिसमें हकीकत की रोशनी पड़ती है। वह कहना चाहते हैं कि मैं खुद कुछ नहीं कहता, बस जो कुछ मेरी कल्पना के आईने में झलकता है, उसे शब्दों में पिरो देता हूँ। यह एक कलाकार की परम विनम्रता है। जैसे एक शांत समुद्र चाँद की रोशनी को खुद में समेट लेता है, वैसे ही कवि का मन सत्य को समेट कर दुनिया को दिखाता है। आपकी सोच वह आईना है जिसमें पूरी कायनात का नूर नज़र आ सकता है।
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