“To steal a heart that's primed for torment, is an impossible feat;Shall I call them lashes, or the gleam of fate's deadly sword?”
एक क्रूर दिल को चुराना असंभव है। मैं इन्हें पलकें कहूँ या भाग्य की तलवार का जौहर कहूँ?
दुज़्दीदन-ए-दिल-ए-सितम-आमादा है मुहाल मिज़्गाँ कहूँ कि जौहर-ए-तेग़-ए-क़ज़ा कहूँ Duzdeedan-e-dil-e-sitam-aamada hai muhaal Mizgaan kahun ki jauhar-e-tegh-e-qaza kahun उस दिल को चुराना या छिपाना नामुमकिन है जो पहले से ही सितम सहने के लिए तैयार बैठा हो। मैं तुम्हारी पलकों को सिर्फ़ पलकें कहूँ या उन्हें मौत की तलवार की चमकती हुई धार कहूँ? यहाँ दुज़्दीदन का अर्थ है किसी चीज़ को चुराना और सितम-आमादा का मतलब है वह जो ज़ुल्म करने के लिए तैयार हो। मिज़्गाँ पलकों को कहते हैं और तेग़-ए-क़ज़ा का अर्थ है मौत या तक़दीर की तलवार। ग़ालिब यहाँ महबूब की नज़रों के जादू और उनकी गहराई के बारे में बता रहे हैं। वे कहते हैं कि जब कोई आपका दिल दुखाने का फैसला कर ही चुका हो तो आप अपने दिल को बचा नहीं सकते। वह दिल तो पहले ही उनके ज़ुल्म के लिए हाज़िर है। वे महबूब की पलकों को देखकर सोच में पड़ जाते हैं। वे पलकें इतनी कोमल और पतली हैं फिर भी उनमें एक तलवार जैसी तेज़ी है। वे कहते हैं कि इन्हें मामूली पलकें कहना शायद ठीक नहीं होगा। ये तो बिल्कुल वैसी हैं जैसे मौत की तलवार की धार हो जो एक ही बार में ज़िंदगी का फैसला कर देती है। यह उस बेबसी का नाम है जब आप किसी की आँखों में डूबकर अपना सब कुछ खो देते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे तूफ़ान की उठती हुई लहरों को देखना। आप जानते हैं कि वे आपको डुबो देंगी फिर भी आप उनकी ताक़त और सुंदरता को देखकर दंग रह जाते हैं। कुछ नज़रें सिर्फ़ देखती नहीं हैं वे आपकी पूरी तक़दीर बदल देती हैं।
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