“Shall I call it a tear, or a sigh riding on the wind?It came so unbridled, what indeed can I say?”
क्या मैं इसे आँसू कहूँ या हवा पर सवार आह? यह इतनी बेकाबू होकर आई कि मैं क्या कहूँ।
आँसू कहूँ कि आह सवार-ए-हवा कहूँ ऐसा 'इनाँ-गुसीख़्ता आया कि क्या कहूँ Aansu kahun ki aah sawar-e-hawa kahun aisa inan-gusikhta aaya ki kya kahun मैं इसे आँसू कहूँ या हवा पर सवार कोई आह? यह इतनी बेकाबू रफ़्तार से आया है कि मैं क्या कहूँ। यहाँ सवार-ए-हवा का मतलब है हवा पर सवार होना और इनाँ-गुसीख़्ता उस घोड़े को कहते हैं जिसकी लगाम टूट गई हो और जो पूरी तरह बेकाबू हो। मेरे दोस्त ग़ालिब यहाँ उस जज़्बात की बात कर रहे हैं जो अचानक बिजली की तरह गिरता है। कभी-कभी दुख इतनी तेज़ी से आता है कि हमें समझ ही नहीं आता कि हम रो रहे हैं या बस गहरी साँस ले रहे हैं। यह उस घोड़े जैसा है जिसकी लगाम हाथ से छूट गई हो और वह सरपट दौड़ रहा हो। आप बस देखते रह जाते हैं और संभलने का वक़्त ही नहीं मिलता। यह वह गहरा दुख है जो धीरे-धीरे नहीं आता बल्कि एक झोंके की तरह आता है और आपको पूरी तरह झकझोर देता है। जैसे अचानक आई वह आँधी जो खिड़की के शीशे तोड़ दे इससे पहले कि आप उन्हें बंद करने के लिए हाथ भी बढ़ा सकें। कुछ दर्द इतने तेज़ होते हैं कि उन्हें कोई नाम नहीं दिया जा सकता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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