मैं और सद-हज़ार नवा-ए-जिगर-ख़राश तू और एक वो न-शुनीदन कि क्या कहूँ

“I, and a hundred thousand heart-rending cries;You, and that single refusal to hear, what can I say?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं हूँ और मेरे लाखों दिल-चीरने वाले नग़मे हैं, और तुम हो और तुम्हारी वो एक न सुनने की आदत, कि क्या कहूँ।

विस्तार

मैं और सद-हज़ार नवा-ए-जिगर-ख़राश, तू और एक वो न-शुनीदन कि क्या कहूँ। Main aur sad-hazaar nawa-e-jigar-kharaash, Tu aur ek woh na-shuneedan ke kya kahoon. एक तरफ मैं हूँ और मेरी वो लाखों दिल चीर देने वाली आवाज़ें हैं, और दूसरी तरफ तुम हो और तुम्हारी वो न सुनने की आदत है जिसे मैं बयां नहीं कर सकता। यहाँ 'सद-हज़ार' का मतलब है एक लाख, 'नवा-ए-जिगर-ख़राश' का मतलब है दिल चीरने वाली आवाज़, और 'न-शुनीदन' का अर्थ है अनसुना कर देना। मेरे पास बैठो दोस्त, इस ढलती शाम में ज़रा ग़ालिब की उस बेबसी को समझो जो उन्होंने इस शेर में पिरोई है। 'S SIDE ग़ालिब कहते हैं कि मेरे सीने में कोई एक आवाज़ नहीं है, बल्कि लाखों ऐसी चीखें हैं जो बाहर निकलने को बेकरार हैं और जिनमें बहुत दर्द है। 'S SIDE लेकिन जिसके लिए यह शोर है, वो इतना खामोश है कि जैसे उसने कभी कुछ सुना ही न हो। यह एक ऐसी बेरुखी है जो इंसान को अंदर तक तोड़ देती है। असल में ग़ालिब उस पल की बात कर रहे हैं जब आपका दुख पहाड़ जैसा हो, लेकिन जिसे आप अपना कहते हैं, वो उसे सुनने से ही इनकार कर दे। यह अनसुना करना ही सबसे बड़ी सजा है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी कांच की दीवार के पीछे खड़े होकर पूरी ताकत से चिल्ला रहे हों, और दूसरी तरफ वाला इंसान आपको देख कर भी नज़रें फेर ले। आवाज़ की कीमत बोलने वाले से नहीं, बल्कि सुनने वाले के एहसास से तय होती है। दुनिया का सबसे बड़ा शोर वह है जो एक बंद कान और पत्थर दिल के सामने दम तोड़ दे।

कठिन शब्द
सद-हज़ार— A hundred thousand, hundreds of thousands, countless
नवा— Sound, voice, melody, song, cry, lament
जिगर-ख़राश— Heart-rending, agonizing, deeply painful, poignant
न-शुनीदन— That which is unheard, unheard of, not to be heard, inaudible

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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