“The wide-open eyes are rings directed towards the heart,Shall I call each strand of her tresses a kohl-like gaze?”
खुली आँखें दिल की ओर घेरे हुए हैं; क्या मैं हर ज़ुल्फ़ के तार को सुरमे जैसी निगाह कहूँ?
हल्क़े हैं चश्म-हा-ए-कुशादा ब-सू-ए-दिल, हर तार-ए-ज़ुल्फ़ को निगह-ए-सुर्मा-सा कहूँ। बालों के छल्ले खुली हुई आँखों की तरह मेरे दिल की ओर देख रहे हैं। मैं ज़ुल्फ़ के हर धागे को काजल लगी हुई एक गहरी नज़र कह सकता हूँ। 'चश्म-हा-ए-कुशादा' का मतलब है खुली हुई आँखें, और 'सुर्मा-सा' का अर्थ है काजल की तरह काली या गहरी निगाह। मेरे दोस्त, कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी के इतने करीब हों कि उनकी चुप्पी भी आपको निहारती हुई लगे? ग़ालिब यहाँ अपनी महबूबा की ज़ुल्फ़ों के छल्लों को देख रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि ये सिर्फ बाल नहीं हैं, बल्कि ये तो खुली हुई आँखें हैं जो सीधे उनके दिल की ओर देख रही हैं। यह उस अहसास के बारे में है जब मोहब्बत में हर चीज़ ज़िंदा हो उठती है। वे कहते हैं कि उनकी ज़ुल्फ़ों का हर एक धागा असल में एक ऐसी निगाह है जिसमें काजल लगा हुआ है, यानी वह बहुत गहरी और रहस्यमयी है। ऐसा लगता है जैसे महबूब का पूरा वजूद ही ग़ालिब के दिल का हाल पढ़ रहा हो। यह वैसा ही है जैसे किसी शांत झील के किनारे बैठे हों और आपको लगे कि पानी की हर लहर आपका अक्स देख रही है। या जैसे कोई पुरानी तस्वीर जो आपको खामोशी से देख रही हो। मोहब्बत में तो महबूब की ज़ुल्फ़ें भी दिल का हाल बताने वाली आँखें बन जाती हैं।
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