हुई है माने-ए-ज़ौक़-ए-तमाशा ख़ाना-वीरानी
कफ़-ए-सैलाब बाक़ी है ब-रंग-ए-पुम्बा रौज़न में
“My home's desolation obstructs the joy of seeing, As foam of the flood remains like cotton in the opening.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे घर की बर्बादी देखने के आनंद में बाधा बन गई है, जैसे सैलाब का झाग रोशनदान में रुई की तरह बाकी है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
