फ़ुज़ूँ की दोस्तों ने हिर्स-ए-क़ातिल ज़ौक़-ए-कुश्तन में
होए हैं बख़िया-हा-ए-ज़ख़्म जौहर तेग़-ए-दुश्मन में
“Friends spurred the killer's greed, their pleasure in the slaughter's thrill; My wounds' stitched seams became the foe's sharp blade's own etched skill.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
दोस्तों ने क़ातिल की हत्या करने की लालच को और बढ़ा दिया। मेरे ज़ख़्मों के टाँके दुश्मन की तलवार के जौहर बन गए हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
