न कह कि ताक़त-ए-रुस्वाई-ए-विसाल नहीं
अगर यही अरक़-ए-फ़ित्ना है मुकर्रर खींच
“Don't say you lack the strength for union's scandal's might,If this be mischief's potent sweat, then draw it, day and night.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यह मत कहो कि मिलन की बदनामी सहने की ताक़त नहीं है। अगर यही फ़ितने का मूल है, तो इसे बार-बार खींचो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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