ग़ज़ल
नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच
نفس نہ انجمنِ آرزو سے باہر کھینچ
यह ग़ज़ल आकांक्षा और लालसा की अविचल खोज की बात करती है। यह अभाव में भी अपनी इच्छाओं के साथ लगातार जुड़े रहने को प्रोत्साहित करती है, तलाशने और देखने में निहित गहन तीव्रता और प्रयास पर ज़ोर देती है। शायर निष्क्रिय इंतज़ार पर सवाल उठाता है, बाधाओं या प्रतिद्वंद्वियों के बावजूद जीवन की आरज़ूओं के प्रति एक सक्रिय और समर्पित दृष्टिकोण का सुझाव देता है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
नफ़स न अंजुमन-ए-आरज़ू से बाहर खींच
अगर शराब नहीं इंतिज़ार-ए-साग़र खींच
अपनी साँस (अस्तित्व) को इच्छाओं की सभा से बाहर मत खींचो। यदि शराब (वांछित वस्तु) उपलब्ध नहीं है, तो कम से कम प्याले के आने की प्रतीक्षा को ही लंबा करो।
2
कमाल-ए-गर्मी-ए-सई-ए-तलाश-ए-दीद न पूछ
ब-रंग-ए-ख़ार मिरे आइने से जौहर खींच
मेरी तुम्हें देखने की कोशिश की चरम तीव्रता के बारे में मत पूछो। बल्कि, काँटे की तरह मेरे दर्पण से उसका सार खींच लो।
3
तुझे बहाना-ए-राहत है इंतिज़ार ऐ दिल
किया है किस ने इशारा कि नाज़-ए-बिस्तर खींच
ऐ दिल, इंतज़ार तुम्हारे लिए आराम का एक बहाना मात्र है। तुम्हें बिस्तर के आराम को छोड़कर इंतज़ार करने का इशारा किसने दिया है?
4
तिरी तरफ़ है ब-हसरत नज़ारा-ए-नर्गिस
ब-कोरी-ए-दिल-ओ-चश्म-ए-रक़ीब साग़र खींच
नर्गिस का नज़ारा तेरी तरफ़ हसरत भरी निगाहों से है। अपने रक़ीब के दिल और आँखों की अंधता में, प्याला खींच।
5
ब-नीम-ग़म्ज़ा अदा कर हक़-ए-वदीअत-ए-नाज़
नियाम-ए-पर्दा-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर से ख़ंजर खींच
केवल एक आधी नज़र से अपनी नज़ाकत का हक़ अदा करो। मेरे कलेजे के ज़ख़्म के परदे की म्यान से ख़ंजर बाहर निकालो।
6
मिरे क़दह में है सहबा-ए-आतिश-ए-पिन्हाँ
ब-रू-ए-सुफ़रा कबाब-ए-दिल-ए-समंदर खींच
मेरे प्याले में छिपी हुई आग की शराब है। दस्तरख़्वान पर समंदर के दिल का कबाब परोसो।
7
न कह कि ताक़त-ए-रुस्वाई-ए-विसाल नहीं
अगर यही अरक़-ए-फ़ित्ना है मुकर्रर खींच
यह मत कहो कि मिलन की बदनामी सहने की ताक़त नहीं है। अगर यही फ़ितने का मूल है, तो इसे बार-बार खींचो।
8
जुनून-ए-आइना मुश्ताक़-ए-यक-तमाशा है
हमारे सफ़्हे पे बाल-ए-परी से मिस्तर खींच
आईने का जुनून बस एक ही नज़ारे का इच्छुक है। हमारे पन्ने पर परी के पंख से लकीरें खींचिए।
9
ख़ुमार-ए-मिन्नत-ए-साक़ी अगर यही है 'असद'
दिल-ए-गुदाख़्ता के मय-कदे में साग़र खींच
हे असद, यदि साक़ी की कृपा से मिलने वाला नशा यही है, तो मेरे पिघलते दिल रूपी मयखाने से प्याला खींच।
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