बहार-ए-ता'ज़ियत आबाद-ए-'इश्क़ मातम है
कि तेग़-ए-यार हिलाल-ए-मह-ए-महरम है
“The spring of condolence is love's populated grief,For the beloved's sword is Muharram's crescent moon.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
शोक की बहार प्रेम का बसा हुआ मातम है, क्योंकि प्रियतम की तलवार मुहर्रम के महीने का नया चाँद है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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