ग़ज़ल
न लेवे गर ख़स-ए-जौहर तरावत सब्ज़ा-ए-ख़त से
نہ لے وے گر خس جوہر طراوت سبزہ خط سے
यह ग़ज़ल 'आतिश' (अग्नि, जुनून, दीप्ति) की सर्वव्यापी और परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाती है। यह बताती है कि कैसे महबूब का तीव्र सौंदर्य दुनिया को प्रज्वलित कर सकता है, आशिक की मुश्किलों को हल कर सकता है, और कैसे यह मौलिक शक्ति चिनार के पेड़ की चमक से लेकर संयम के सार तक विभिन्न रूपों में प्रकट होती है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
1
न लेवे गर ख़स-ए-जौहर तरावत सब्ज़ा-ए-ख़त से
लगाए ख़ाना-ए-आईना में रू-ए-निगार आतिश
यदि दर्पण का मूल तत्व प्रिय के नवयौवन के मुख की हरियाली से ताज़गी प्राप्त न करे, तो प्रिय का चेहरा ही दर्पण के घर में आग लगा देगा।
2
फ़रोग़-ए-हुस्न से होती है हल्ल-ए-मुश्किल-ए-आशिक़
न निकले शम' के पा से निकाले गर न ख़ार आतिश
प्रेमी की कठिनाइयाँ सुंदरता की चमक से हल होती हैं। जैसे चिराग के पैर से काँटा तब तक नहीं निकलता जब तक आग उसे न निकाले।
3
हुई है बस कि सर्फ़-ए-मशक़ तमकीन-ए-बहार आतिश
ब-अंदाज़-ए-हिना है रौनक़ दस्त-ए-चिनार आतिश
बसंत की अग्नि का प्रताप उसके प्रदर्शन में ही पूरी तरह खर्च हो गया है। चिनार के पत्ते की चमक मेहंदी के रंग जैसी है, एक अग्निपूर्ण दृश्य।
4
शरर है रंग बा'द इज़हार-ए-ताब-ए-जल्वा-ए-तम्कीं
करे है संग पर ख़ुर्शीद आब-ए-रू-ए-कार आतिश
गरिमामय वैभव की चमकदार रोशनी के प्रकट होने के बाद एक चिंगारी केवल एक रंग है। सूरज खुद पत्थर पर आग का पिघलाने वाला कार्य करता है।
5
पनावे बे-गुदाज़-ए-मोम रब्त-ए-पैकर-आराई
निकाले क्या निहाल-ए-शम्अ बे-तुख़्म-ए-शरार आतिश
मोम के पिघले बिना कोई आकृति नहीं बन सकती, और चिंगारी के बीज के बिना मोमबत्ती का अंकुर आग नहीं निकाल सकता है।
6
ख़याल-ए-दूद था सर-जोश-ए-साैदा-ए-ग़लत-फ़हमी
अगर रखती न ख़ाकिस्तर-नशीनी का ग़ुबार आतिश
धुएँ का विचार एक गलतफहमी के उन्माद का चरम था, यदि आग स्वयं राख में परिवर्तित होने का अंश न धारण करती।
7
हवा-ए-पर-फ़िशानी बर्क़-ए-ख़िर्मन-हा-ए-ख़ातिर है
ब-बाल-ए-शोला-ए-बेताब है परवाना-ज़ार आतिश
पंख फड़फड़ाने की इच्छा मन के संचित विचारों और भावनाओं के लिए बिजली के समान है। आग स्वयं, एक पतंगे की तरह, बेचैन लौ के पंखों पर रहती है।
8
नहीं बर्क़-ओ-शरर जुज़ वहशत-ए-ज़ब्त-ए-तपीदन-हा
बिला गर्दान-ए-बे-परवा ख़रामी-हा-ए-यार आतिश
यह बाहरी बिजली और चिंगारी नहीं है, बल्कि दबी हुई धड़कनों की गहन बेचैनी है। यह आंतरिक अग्नि प्रियतम की बेपरवाह चालों के लिए एक सुरक्षात्मक बलि/उपाय है।
9
धुएँ से आग के इक अब्र-ए-दरिया-बार हो पैदा
'असद' हैदर-परस्तों से अगर होवे दो-चार आतिश
हे 'असद', यदि आग हैदर के भक्तों से दो-चार हो तो आग के धुएँ से एक वर्षा करने वाला बादल उत्पन्न हो सकता है।
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