न सताइश की तमन्ना न सिले की पर्वा
गर नहीं हैं मिरे अशआ'र में मा'नी न सही
“No desire for praise, nor care for reward; if my verses lack meaning, then so be it.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे न तो प्रशंसा की इच्छा है और न ही पुरस्कार की परवाह। अगर मेरी शायरी में कोई अर्थ नहीं है, तो न सही।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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