इशरत-ए-सोहबत-ए-ख़ूबाँ ही ग़नीमत समझो
न हुई 'ग़ालिब' अगर उम्र-ए-तबीई न सही
“Consider the joy of fair company a blessing untold,If natural life, Ghalib, you don't get to hold.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
प्रियजनों की संगत की खुशी को ही गनीमत समझो, 'गालिब', भले ही तुम्हें प्राकृतिक लंबी आयु प्राप्त न हुई हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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