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एक हंगामे पे मौक़ूफ़ है घर की रौनक़ नौहा-ए-ग़म ही सही नग़्मा-ए-शादी सही

The vibrancy of a home depends on some activity,Let it be a lament of sorrow, if not a song of joy.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

घर की रौनक किसी हंगामे पर निर्भर करती है; अगर खुशी का गीत न हो तो गम का नौहा ही सही।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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