मंज़ूर थी ये शक्ल तजल्ली को नूर की
क़िस्मत खुली तिरे क़द-ओ-रुख़ से ज़ुहूर की
“This form of light was accepted by divine manifestation,Your stature and face opened the destiny of its appearance.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
नूर की तजल्ली को यह शक्ल मंज़ूर थी। इसके ज़ुहूर की किस्मत तुम्हारे कद-ओ-रुख़ से खुली।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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