'मीर' के शेर का अहवाल कहूँ क्या 'ग़ालिब' — मिर्ज़ा ग़ालिब
“What can I say of Mir's poetic art, O Ghalib? / Whose divan is nothing less than Kashmir's blooming garden.”
अर्थ
ऐ ग़ालिब, मैं मीर की शायरी का क्या हाल बयान करूँ, जिनका काव्य-संग्रह (दीवान) कश्मीर के ख़ूबसूरत बाग़ से किसी तरह कम नहीं है।
विस्तार
यहाँ ग़ालिब अपने से पहले के अज़ीम शायर मीर तक़ी 'मीर' को बेहद अदब और मुहब्बत से सलाम पेश कर रहे हैं। वे कहते हैं कि भला मीर की शायरी की क्या मिसाल दी जाए, उनका कलाम तो हुस्न और एहसास से लबरेज़ कश्मीर के किसी हसीन बाग़ से कम नहीं है। अपनी बेपनाह अना के लिए मशहूर ग़ालिब का यह क़बूलनामा बताता है कि मीर के हर शेर में कश्मीर जैसी ही ताज़गी, रूहानी ख़ूबसूरती और पुरअसर कशिश बसी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
