ब-जुज़ परवाज़-ए-शौक़-ए-नाज़ क्या बाक़ी रहा होगा
क़यामत इक हवा-ए-तुंद है ख़ाक-ए-शहीदाँ पर
“What else could have remained, save the soaring flight of proud longing?Doomsday is but a fierce wind upon the dust of martyrs.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
गर्वयुक्त अभिलाषा की उड़ान के अतिरिक्त और क्या शेष रहा होगा? क़यामत तो शहीदों की धूल पर मात्र एक तेज़ हवा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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