न लड़ नासेह से 'ग़ालिब' क्या हुआ गर उस ने शिद्दत की
हमारा भी तो आख़िर ज़ोर चलता है गरेबाँ पर
“Ghalib, don't quarrel with the preacher, what if he was harsh? After all, our own hand too has power over our collar.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ालिब, उपदेशक से मत लड़ो; क्या हुआ अगर उसने सख्ती की? आख़िर हमारा भी तो अपने गिरेबाँ पर ज़ोर चलता है (यानी हम अपनी परेशानी में खुद अपना गिरेबाँ फाड़ सकते हैं)।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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