न छोड़ी हज़रत-ए-यूसुफ़ ने याँ भी ख़ाना-आराई सफ़ेदी दीदा-ए-याक़ूब की फिरती है ज़िंदाँ पर

“Prophet Yusuf, even here, did not abandon his charming sway,The whiteness of Yaqub's eyes roams over the prison, night and day.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हज़रत यूसुफ़ ने कारागार में भी अपनी मनमोहक छवि या प्रभाव को नहीं छोड़ा। हज़रत याक़ूब की आँखों की सफ़ेदी (गहरे ग़म के कारण) उसी कारागार पर फिरती है, मानो उन्हें खोज रही हो।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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न छोड़ी हज़रत-ए-यूसुफ़ ने याँ भी ख़ाना-आराई | Sukhan AI