ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है — मिर्ज़ा ग़ालिब
ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है
हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमाँ क्यूँ हो
“Is this calamity not enough for a man's home's ruin?For one whose friend you became, why should the heavens be his foe?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
क्या यह मुसीबत किसी इंसान के घर की बर्बादी के लिए काफी नहीं है? जिस व्यक्ति के तुम दोस्त बन गए, उसका दुश्मन आसमान क्यों बनेगा?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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