क्या बयाँ कर के मिरा रोएँगे यार
मगर आशुफ़्ता-बयानी मेरी
“What will my friends recount of me, and weep? Except my distraught and incoherent speech.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे दोस्त मेरा क्या बयान करके रोएँगे? सिवाय मेरी उलझी हुई और असंगत बातों के।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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