हूँ ज़-ख़ुद रफ़्ता-ए-बैदा-ए-ख़याल
भूल जाना है निशानी मेरी
“Lost to myself, in imagination's wide desert, My very sign, my mark, is to be erased.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं अपनी कल्पना के विस्तृत रेगिस्तान में स्वयं को भुला चुका हूँ, और भूल जाना ही मेरी पहचान है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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