ऐ करम न हो ग़ाफ़िल वर्ना है 'असद' बे-दिल — मिर्ज़ा ग़ालिब
ऐ करम न हो ग़ाफ़िल वर्ना है 'असद' बे-दिल
बे-गुहर सदफ़ गोया पुश्त-ए-चश्म-ए-नैसाँ है
“O Grace, be not unmindful, lest 'Asad' be rendered heart-bereft;A pearl-less shell is like Naisan's eye averted, naught of worth is left.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ करम, लापरवाह मत हो, नहीं तो 'असद' बे-दिल हो जाएगा। बिना मोती का सीप ऐसे है जैसे नैसाँ की आँख का फिर जाना, जिसमें उसे कुछ भी कीमती नहीं मिलता।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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