लाग हो तो उस को हम समझें लगाव — मिर्ज़ा ग़ालिब

लाग हो तो उस को हम समझें लगाव जब न हो कुछ भी तो धोका खाएँ क्या

“If there's some connection, we'll deem it affection; When there's absolutely nothing, how can we be deceived?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

यदि कोई संबंध या लगाव हो, तो हम उसे अपनापन समझेंगे। जब कुछ भी न हो, तो हमें धोखा कैसे मिल सकता है?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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