बेकारी-ए-जुनूँ को है सर पीटने का शुग़्ल — मिर्ज़ा ग़ालिब
“Idle madness occupies itself by beating its head; but once the hands are broken, what can one do?”
अर्थ
दीवानेपन की बेकारी का काम अपना सिर पीटना है, लेकिन जब हाथ ही टूट जाएँ तो फिर कोई क्या कर सकता है?
विस्तार
ग़ालिब यहाँ बेबसी और दीवानगी की उस इंतहा को बयां कर रहे हैं जहाँ इंसान का दर्द ही उसका अकेला सहारा बन जाता है। जब कोई चारा नहीं बचता, तो जुनूँ अपने खालीपन को मिटाने के लिए सर पीटने का सहारा लेता है ताकि बेचैनी किसी तरह ज़ाहिर हो सके। मगर शायर बड़ी तल्ख़ी से पूछता है कि अगर लगातार मातम करते-करते हाथ ही टूट जाएँ, तो फिर लाचार इंसान क्या करे? यह शेर उस चरम बेचारगी की तस्वीर है जहाँ रोने और तड़पने की ताक़त भी छिन जाती है।
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