आश्ना 'ग़ालिब' नहीं हैं दर्द-ए-दिल के आश्ना — मिर्ज़ा ग़ालिब

आश्ना 'ग़ालिब' नहीं हैं दर्द-ए-दिल के आश्ना वर्ना किस को मेरे अफ़्साने की ताब-ए-इस्तिमाअ'

“O Ghalib, they who claim acquaintance know not the heart's deepest pain;Else, who would possess the patience to hear my sorrowful refrain?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

हे ग़ालिब, जो लोग खुद को परिचित समझते हैं, वे दिल के दर्द से वाकिफ नहीं हैं। वर्ना मेरे दुखभरे अफ़साने को सुनने की किसी में हिम्मत नहीं होती।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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