चार सू-ए-दहर में बाज़ार-ए-ग़फ़लत गर्म है — मिर्ज़ा ग़ालिब

चार सू-ए-दहर में बाज़ार-ए-ग़फ़लत गर्म है अक़्ल के नुक़साँ से उठता है ख़याल-ए-इन्तिफ़ाअ'

“Through the world's expanse, the market of neglect holds sway,From intellect's own loss, the dream of gain holds day.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्थ

दुनिया में चारों ओर लापरवाही का बाज़ार गर्म है। अक्ल के नुकसान से ही फायदे का ख्याल उठता है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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