ग़ज़ल

हुजूम-ए-ग़म से याँ तक सर-निगूनी मुझ को हासिल है

ہجوم غم سے یاں تک سرنگونی مجھ کو حاصل ہے
मिर्ज़ा ग़ालिब· Ghazal· 7 shers· radif: है

यह ग़ज़ल दुःख के अत्यधिक बोझ का वर्णन करती है, जो दृष्टि और स्वयं के बीच की रेखा को धुंधला कर देता है। यह घाव भरने के दर्द में पाए जाने वाले विरोधाभासी आनंद को दर्शाती है, जो पीड़ा की गहरी स्वीकृति का सुझाव देती है। यह ग़ालिब की परिवर्तनकारी उपस्थिति और यह भी बताती है कि कैसे महबूब की आत्म-प्रशंसा स्नेह में बाधा बनती है।

Source: rekhta · HI

गीत सुनें
लिपि व अर्थ
1
हुजूम-ए-ग़म से याँ तक सर-निगूनी मुझ को हासिल है कि तार-ए-दामन ओ तार-ए-नज़र में फ़र्क़ मुश्किल है
मैं दुखों के भारी बोझ से इतना झुका हुआ हूँ कि मेरे दामन का धागा और मेरी नज़र की डोर एक जैसे लगने लगे हैं, जिससे उनमें फ़र्क़ करना कठिन हो गया है।
2
रफ़ू-ए-ज़ख्म से मतलब है लज़्ज़त ज़ख़्म-ए-सोज़न की समझियो मत कि पास-ए-दर्द से दीवाना ग़ाफ़िल है
ज़ख्म को रफ़ू करने का मतलब है सुई के ज़ख्म का आनंद। यह मत समझना कि यह दीवाना दर्द के सम्मान से बेख़बर है।
3
वो गुल जिस गुल्सिताँ में जल्वा-फ़रमाई करे 'ग़ालिब' चटकना ग़ुंचा-ए-गुल का सदा-ए-ख़ंदा-ए-दिल है
हे ग़ालिब, जिस बाग़ में वो फूल अपनी सुंदरता दिखाता है, गुलाब की कली का खिलना दिल की हँसी की आवाज़ है।
4
हुआ है माने-ए-आशिक़-नवाज़ी नाज़-ए-ख़ुद-बीनी तकल्लुफ़-बर-तरफ़ आईना-ए-तमईज़ हाएल है
उनकी आत्म-प्रशंसा का घमंड प्रेमियों पर कृपा करने में बाधा बन गया है। सच कहूँ तो, विवेक का दर्पण ही असल बाधा है।
5
ब-सैल-ए-अश्क लख़्त-ए-दिल है दामन-गीर मिज़्गाँ का ग़रीक़-ए-बहर जूया-ए-ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-साहिल है
आँसुओं के सैलाब से बहते हुए दिल के टुकड़े पलकों से लिपटे हुए हैं, जैसे कोई समुद्र में डूबता हुआ किनारे के तिनके और कचरे को सहारा बनाने की तलाश करता है।
6
बहा है याँ तक अश्कों में ग़ुबा-ए-कुल्फ़त-ए-ख़ातिर कि चश्म-ए-तर में हर इक पारा-ए-दिल पा-ए-दर-गिल है
हृदय के कष्ट की धूल आँसुओं में यहाँ तक बही है कि नम आँखों में दिल का हर टुकड़ा कीचड़ में फँसा हुआ है।
7
निकलती है तपिश में बिस्मिलों की बर्क़ की शोख़ी ग़रज़ अब तक ख़याल-ए-गर्मी-ए-रफ़्तार क़ातिल है
मरते हुए (बिस्मिलों) की तपिश (पीड़ा/गर्मी) में बिजली की तेज़ी और चंचलता निकलती है। संक्षेप में, अभी तक कातिल (प्रेमी/प्रेमिका) की चाल की गर्मी (तीव्रता) का विचार ही जानलेवा है।
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.