निकलती है तपिश में बिस्मिलों की बर्क़ की शोख़ी
ग़रज़ अब तक ख़याल-ए-गर्मी-ए-रफ़्तार क़ातिल है
“From the heat of the dying, flashes forth the lightning's playful might,Indeed, the thought of killer's ardent gait still brings death's blight.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मरते हुए (बिस्मिलों) की तपिश (पीड़ा/गर्मी) में बिजली की तेज़ी और चंचलता निकलती है। संक्षेप में, अभी तक कातिल (प्रेमी/प्रेमिका) की चाल की गर्मी (तीव्रता) का विचार ही जानलेवा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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