हुई जिन से तवक़्क़ो' ख़स्तगी की दाद पाने की
वो हम से भी ज़ियादा ख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितम निकले
“From those we hoped would soothe our wounds and hear our plea, We found they suffered more from tyranny's sharp sword than we.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
जिन लोगों से हमें अपनी पीड़ा का न्याय मिलने की उम्मीद थी, वे हमसे भी ज़्यादा ज़ुल्म की तलवार से घायल निकले।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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