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साक़ी बहार-ए-मौसिम-ए-गुल है सुरूर-बख़्श
पैमाँ से हम गुज़र गए पैमाना चाहिए

O Saqi, the spring flower season is pure ecstasy, We've gone beyond our vows, a full goblet is what we need.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे साक़ी, फूलों का बसंत ऋतु आनंददायक है। हम अपनी प्रतिज्ञा से आगे निकल गए हैं, अब हमें पूरा प्याला चाहिए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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