मस्ताना तय करूँ हूँ रह-ए-वादी-ए-ख़याल
ता बाज़-गश्त से न रहे मुद्दआ मुझे
“Intoxicated, I tread imagination's vast domain,Lest any desire for return should ever remain.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं मदहोशी में कल्पनाओं की घाटी का रास्ता तय कर रहा हूँ, ताकि मुझे वापसी की कोई इच्छा न रहे।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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