करती है आजिज़ी-ए-सफ़र सोख़्तन तमाम
पैराहन-ए-ख़सक में ग़ुबार-ए-शरर है आज
“The journey's meekness consumes all entirely,In the garment of dry grass, sparks' dust is today.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सफर की विनम्रता सब कुछ पूरी तरह भस्म कर देती है। आज सूखे घास के लिबास में चिंगारी का गुबार है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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