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वो देख के हसन अपना मग़रूर हुआ 'ग़ालिब'
सद जल्वा-ए-आईना यक सुब्ह-ए-जुदाई है

He grew vain, Ghalib, seeing his own beauty,A hundred mirror-glimpses amount to one dawn of parting.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ग़ालिब, वह अपनी सुंदरता देखकर अहंकारी हो गया। सौ बार आईने में देखना जुदाई की एक सुबह के बराबर है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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