Sukhan AI
हंगाम-ए-तसव्वुर हों दरयूज़ा-गर-ए-बोसे
ये कासा-ए-ज़ानू भी इक जाम-ए-गदाई है

Let imagination's hour make me a beggar for kisses; This bowl-like knee too is a mendicant's cup.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

कल्पना के क्षणों में, मैं चुंबनों का भिखारी बन जाऊँ। यह घुटनों का कटोरा भी एक भिखारी का प्याला है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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