“In the gathering, rivals kiss the lip of the wine cup, while parched-lipped, I thirst even for a single message.”
महफ़िल में ग़ैर तो शराब के जाम को चूम रहे हैं, जबकि हम महबूब के एक पैग़ाम के लिए भी प्यासे तरस रहे हैं।
मीर इस शे'र में बेबसी और तक़दीर के दर्दनाक फ़र्क़ को बड़ी सादगी से बयां करते हैं। महफ़िल में ग़ैर यानी रक़ीब शराब के जाम को चूमकर महबूब की क़ुर्बत का जश्न मना रहे हैं, जबकि सच्चा आशिक़ इस क़दर महरूम है कि उसे एक मामूली पैग़ाम की ख़ातिर भी प्यासा तरसना पड़ रहा है। यह तज़ाद (टकराव) उस गहरी टीस को दिखाता है, जहाँ अजनबियों को तो सब कुछ मिल जाता है और वफ़ादार के हिस्से में सिर्फ़ इंतज़ार आता है।
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