बताओ उस मिज़ा को देख कर कि मुझ को क़रार
वो नीश हो रग-ए-जाँ में फ़रो तो क्यूँकर हो
“Tell me, how can I find peace, once that gaze meets my eye?When that sting, in life's own vein, has settled deep inside?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
बताओ उस निगाह को देखकर मुझे कैसे चैन आ सकता है? जब वो चुभन मेरी जान की रगों में उतर चुकी हो, तो ऐसा कैसे हो सकता है?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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