उड़ती फिरे है ख़ाक मिरी कू-ए-यार में
बारे अब ऐ हवा हवस-ए-बाल-ओ-पर गई
“My dust now flits about in the beloved's lane,At last, O wind, the desire for wings is gone.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरी धूल अब महबूब की गली में उड़ती फिर रही है। ऐ हवा, आखिरकार अब उड़ने (पंखों) की चाहत ख़त्म हो गई है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
