वो बादा-ए-शबाना की सरमस्तियाँ कहाँ
उठिए बस अब कि लज़्ज़त-ए-ख़्वाब-ए-सहर गई
“Where are those raptures of the night's heady wine?Arise now, for morning's sweet dream is no longer thine.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
रात की शराब के वे नशे कहाँ हैं? अब उठ जाइए क्योंकि सुबह के सपने का मज़ा चला गया है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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