Sukhan AI
इश्क़ ने पकड़ा था 'ग़ालिब' अभी वहशत का रंग रह गया था दिल में जो कुछ ज़ौक़-ए-ख़्वारी हाए हाए

Love, Ghalib, had not yet assumed madness's hue,Whatever taste for disgrace remained in the heart, alas, it's true!

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ग़ालिब, प्रेम ने अभी तक पागलपन का रंग नहीं पकड़ा था। दिल में अपमान सहने का जो भी शौक़ बचा था, अफ़सोस, वह भी जाता रहा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.